युँ ताे नदियाँ तेरी अविरल धारा बहता पानी गाेते लगाता, लहरें बनाता
कभी पानी मे खामाेशी ताे कभी गूँजती महसुस हाेती है.
किनाराें पर पडे़ पत्थर, अपने चट्टान हाेने का बयाँ करते है.
कुछ अपने टुटकर कर बिखर जाने का प्रमाण देते हैं.
कुछ इसकी गहराई मे खाेते हुवे नजर आते हैं
तत्पर रहना आगे बढ़ना,झंझावताें से लड़ते रहना.
फिर भी आगे बढ़ते रहना.
एक दिन सबके साथ मिल जाना.
फिर एक सागर कहलाना.
इस जिन्दगी काे जीना सीखाती है.
अपने निरन्तर चलते रहने की सीख सीखा जाती है.
कभी पीछे मुड़कर ना देखना
बस आगे बढ़ते रहना
इस जिन्दगी काे जीने का राग बताती है़।।